सभी कान खोलकर सुन लो मुझे डहर वाले खेतों में नहर के साथ वाला खेत ही  लेना है, छोटे भाई की दहाड़ सुनकर दोनों बड़े भाई सहम गए। बीच वाले ने माँ बाबा के रुपए, पैसों का हिसाब किताब लगाया और उसका बँटवारा करते समय अपने पिछले एक साल के दौरान माँ बाबा की दवाइयों, उनके खाने पीने के लिए किए गए छोटे मोटे सभी खर्च जोड़ लिए। आए दिन के झगडों व आपसी मन मुटाव के चलते तीनों भाइयों ने सब जमीन जायदाद, रुपये, पैसे, जेवर, मकान, बर्तन—भांडे, पशु तक बाँट लिए। अपने बँटवारे के डर से भयभीत बूढ़े माँ बाप घर के पिछवाड़े वाले जर्जर कमरे में दुबके बैठे थे की अचानक बाहर से आने वाली आवाजें आना बंद हो गया । दोनों बुजुर्ग चिंतित और उत्सुक थे यह जानने के लिए की उनको कोनसे जिगर के टुकड़े  ने लिया है, वे दोनों किसके हिस्से में आए हैं? शायद कोई उनको आकर बताएगा, संभालेगा, खाना खिलाएगा? यही बाट जोहते जायदाद के असली वारिस मन मसोसकर भूखे ही सो गए लेकिन टूटे फूटे दरवाजे पर देर रात तक भी कोई दस्तक नहीं हुई ।

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